• पूसा संस्‍थान-स्‍वयंसेवी संस्‍थान सहयोगात्‍मक कार्यक्रम
    पूसा संस्‍थान ने एक और किसान केंद्रित प्रसार कार्यक्रम की शुरूआत की है। यह सहयोगात्‍मक प्रसार कार्यक्रम देशभर के स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं (VOs) के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। इस प्रयास में, संस्‍थान ने देश के विभिन्‍न भागों से 31 स्‍वयंसेवी संस्‍थानों को अपने साथ जोड़ा है। इस अवधारणा में मुख्‍य लक्ष्‍य यह है कि स्‍वयंसेवी संस्‍थानों के जमीनी आधार का उपयोग किया जाए और उन्‍हें पूसा संस्‍थान के संभारतंत्रीय सहयोग एवं उन्‍नत कृषि उत्‍पादन प्रौद्योगिकियों का सहयोग दिया जाए, ताकि वे इनका स्‍थानीय स्‍तर पर प्रक्षेत्र आकलन और प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण कर सकें। इस तरह स्‍वयंसेवी संस्‍थानों, किसानों और पूसा संस्‍थान को तीन गुना लाभ सुनिश्चित किया गया है। यह परियोजना भी सन 2010 से प्रारंभ हुई।
  • पूसा कृषि विज्ञान मेला:
    पूसा कृषि विज्ञान मेला 2015 का आयोजन मार्च 10-12, 2015 को किया जाएगा।
    मुख्‍य विषय: समग्र विकास के लिए पूसा संस्‍थान की प्रौद्योगिकियाँ

    पूसा संस्‍थान हर वर्ष पूसा कृषि विज्ञान मेले का आयोजन करता है। तीन दिनों तक चलने वाला यह मेला एक ज्‍वलंत विषय पर आधारित होता है। इस मेले का उद्घाटन आमतौर पर माननीय कृषि मंत्री के करकमलों द्वारा किया जाता है, तथा सचिव डेयर, और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा अन्‍य गणमान्‍य अतिथि भी मौजूद होते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान द्वारा विकसित एवं एक विषय पर केंद्रित प्रौद्योगिकियाँ एक विशाल थीमेटिक मंडप में प्रदर्शित की जाती हैं।

    मेले में पूसा संस्‍थान के अलावा राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के उद्यम, स्‍वयंसेवी संस्‍थान / सोसाइटियाँ तथा प्रगतिशील किसान भी इस मेले में भाग लेते हैं और कृषक समुदाय के लाभ के लिए अपनी-अपनी प्रौद्योगिकियाँ प्रदर्शित करते हैं। देश के विभिन्‍न भागों से बड़ी संख्‍या में आगंतुक आते हैं, जिनमें किसान, खेतिहर महिलाएँ, छात्र, प्रसार कर्मी, उद्यमी एवं अन्‍य शामिल हैं।

    किसानों को विभिन्‍न जीवंत प्रदर्शनियों, संरक्षित खेती प्रणालियों और संस्‍थान के प्रायोगिक प्रक्षेत्रों को दिखाने के लिए प्रक्षेत्र भ्रमण का आयोजन किया जाता है। किसानों / खेतिहर महिलाओं में ज्ञान और सूचना का आदान-प्रदान बढ़ाने के ‍लिए तीन तकनीकी सत्र और एक महिला सशक्‍तीकरण कार्यशाला का भी आयोजन किया जाता है।

    किसान परामर्श सेवा प्रकोष्‍ठ संपूर्ण मेला अवधि के दौरान कार्य करता रहा है जहाँ किसान पूसा संस्‍थान / राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों / अन्‍य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्‍थानों के विषय वस्‍तु विशेषज्ञों द्वारा कृषि परामर्श सेवाएँ तथा अपनी खेती संबंधी समस्‍याओं का तत्‍काल समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

    मेले में पूसा बीज विक्रय काउंटर में विभिन्‍न फसलों के उच्‍च उपजशील बीज बेचे जाते हैं। मेले में संस्‍थान के संचालनीय क्षेत्रों के अनेक किसान भी अपना स्‍टॉल लगाते हैं और उसमें पूसा संस्‍थान के साथ कृषक सहभागिता बीज उत्‍पादन कार्यक्रम के अंतर्गत उत्‍पादित उच्‍च उपजशील प्रजातियों के बीजों को बेचते हैं।
    कृषि विज्ञान मेले के समापन समारोह के दौरान विभिन्न राज्‍यों के प्रगतिशील किसानों / खेतिहर महिलाओं को सम्‍मानित किया जाता है। पूसा कृषि विज्ञान मेले के मुख्‍य विषय निम्नलिखित हैं:

    क्र.

    वर्ष

    कृषि विज्ञान मेले के मुख्‍य विषय

    1.

    2010

    राष्ट्रीय समृद्धि के लिए कृषि प्रौद्योगिकियाँ

    2.

    2011

    अधिक उत्‍पादकता और आय हेतु प्रक्षेत्र प्रौद्योगिकियाँ

    3.

    2012

    नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों द्वारा समृद्धि

    4.

    2013

    कृषक समृद्धि के लिए कृषि प्रौद्योगिकियाँ

    5.

    2014

    टिकाऊ उत्‍पादन के लिए जलवायु तन्‍यक कृषि प्रौद्योगिकियाँ

    प्रगतिशील /नवोन्‍मेषी किसानों को पुरस्‍कृत करना कृषि विज्ञान मेले का एक मुख्‍य आकर्षण है। इससे किसानों को प्रोत्‍साहन मिलता है। किसानों को उनके द्वारा विकसित नवप्रवर्तनों और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए पुरस्‍कृत किया जाता है।

    अधिक जानकारी एवं स्‍टॉल बुकिंग आदि के लिए कृपया संपर्क करें:

    डॉ. बी.के. सिंह
    आयोजन सचिव मेला और
    प्रभारी, कैटेट, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली – 110012
    फोन : 011-25842905
    ईमेल: head_catat[at]iari[dot]res[dot]in

  • किसानों एवं प्रसार कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम
    दिल्‍ली के विकास विभाग के प्रसार कर्मियों और किसानों के ज्ञान और कौशल के नवीनीकरण के लिए संबंधित विषयों पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अयोजन किया जाता है। संस्‍थान में संसाधनों, छात्रावास एवं अन्‍य सुविधाओं की उपलब्‍धता के आधार पर विभिन्न राज्‍य विकास विभागों / स्‍वयंसेवी संस्‍थानों आदि के द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
  • प्रदर्शन
    यह केंद्र देश के विभिन्‍न भागों में लगने वाली अंतरराष्‍ट्रीय / राष्‍ट्रीय / क्षेत्रीय / संस्‍थागत कृषि प्रदर्शनियों में भाग लेकर उनमें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान की प्रौद्योगिकियाँ और सेवाएँ प्रदर्शित एवं प्रचारित-प्रसारित करता है।
  • प्रक्षेत्र दिवस
    कैटेट किसानों के खेत पर समय-समय पर प्रक्षेत्र दिवस आयोजित करता है। ये प्रक्षेत्र दिवस प्रदर्शन क्षेत्रों में रबी या खरीफ ऋतुओं पर आयोजित किए जाते हैं।
  • अग्रपंक्ति प्रदर्शन
    केंद्र की ओर से नियमित रूप से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों, हरियाणा और दिल्‍ली के राष्‍ट्रीय राजधानी के अंतर्गत आने वाले जिलों के चयनित गांवों में गेहूँ (गेहूं अनुसंधान निदेशालय द्वारा प्रायोजित) और मक्‍के (मक्‍का अनुसंधान निदेशालय द्वारा प्रायोजित) के अग्र पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत गेहूँ और मक्‍के की नवीन प्रजातियों और उन्‍नत उत्‍पादन प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया जाता है।
  • किसानों के क्षमतावर्धन के लिए जनसंचार संबंधी पहल और आकाशवाणी कृषि पाठशाला
    बड़े पैमाने पर किसानों के स्‍तर पर प्रौद्योगिकियों को तीव्र गति से हस्‍तांतरित करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, पूसा नई दिल्‍ली, ऑल इंडिया रेडियो, नई दिल्‍ली एवं दूरदर्शन, नई दिल्‍ली ने आपसी सहयोग करते हुए एक मॉडल के रूप में नई पहल की है। इसके अंतर्गत विभिन्‍न फसलों और उनकी उत्‍पादन प्रौद्योगिकियों पर आकाशवाणी कृषि पाठशाला और कृषि दर्शन पाठशालाओं का आयोजन किया गया।
  • प्रकाशन
    केंद्र समय-समय पर किसानों के लिए उपयोगी तकनीकी बुलेटिन, पुस्तिकाएँ और पम्‍फलेट के रूप में प्रकाशित करता रहता है।
  • उत्‍पादन इकाई
    केंद्र का एक महत्‍वपूर्ण घटक उत्‍पादन इकाई है। इसमें किसानों की आवश्‍यकतानुसार समस्‍याओं के समाधान एवं विभिन्‍न कार्यात्‍मक अनुसंधान / तकनीकी हस्‍तांतरण कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संस्‍थान के विभिन्‍न संभागों एवं केंद्रों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले वैज्ञानिकों को इकट्ठा किया गया है। यह इकाई केंद्र के कार्यों को कार्यान्वित करने में मदद करती है।