प्रशिक्षण 

  • इस संभाग की प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों को 1995 के पश्‍चात् तब अधिक गति मिली जब कृषि प्रसार पर प्रगत अध्‍ययन केन्‍द्र स्‍थापित हुआ।
  • यहां औसतन प्रतिवर्ष तीन-चार कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। अब तक इस संभाग में 160 से अधिक कार्यक्रमों के माध्‍यम से 350 प्रसार व्‍यवसायविदों, शिक्षकों, छात्रों तथा किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
  • संभाग ने 1960 के दशक से किसानों, खेती करने वाले युवाओं, प्रसार व्‍यवसायविदों, विकास   प्रबंधकों, वैज्ञानिकों और शिक्षकों के लिए प्रसार शिक्षा की प्रक्रिया के मौलिक व व्‍यवहारिक पहलुओं पर नए-नए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने में सक्रिय एवं नेतृत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अब प्रसार की भागीदारी संबंधी क्रियाविधि, देसी प्रौद्योगिकी, प्रबंधात्‍मक निपुणताओं में सुधार, नेतृत्‍व के विकास, उद्यमशीलता के विकास तथा खेतीहर महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे नए उभरते हुए क्षेत्रों में ज्ञान और निपुणता पर विशेष बल दिया जाने लगा है।
  • इस प्रशिक्षण क्रियाविधि में संवादात्‍मक व्‍याख्‍यान, व्‍याख्‍यानों से जुड़े अभ्‍यास, अनुरेखण खेल तथा विशिष्‍ट मामलों के अध्‍ययन जैसे नए-नए पहलू शामिल किये गए हैं।

संभाग द्वारा डिजाइन किये गए व चलाए गए कुछ प्रशिक्षण कार्यक्रम निम्‍नानुसार हैं :

  1. प्रसार अनुसंधान में प्रगतियों पर प्रशिक्षण
  2. अनुसंधान एवं विकास के लिए परियोजना प्रबंध
  3. कृषि में उद्यमशीलता का विकास
  4. प्रसार कार्मिकों के लिए प्रबंधात्‍मक विकास
  5. प्रशिक्षण विधि विज्ञान में प्रगतियां
  6. प्रेरणा संबंधी विकास
  7. मल्‍टीमीडिया विकास
  8. परियोजना निगरानी एवं मूल्‍यांकन
  9. लिंग सशक्तिकरण के लिए भागीदारी विकास दृष्टिकोण
  10. कृषि में देसी तकनीकी ज्ञान
  11. मानव संसाधन विकास एवं प्रबंध
  12. वाणिज्यिक कृषि हेतु भागीदारी प्रसार दृष्टिकोण