एम.एससी. व पीएच.डी. के लिए जल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर एक स्‍नातकोत्‍तर कार्यक्रम 1996 से आरंभ किया गया। मूल पाठ्यक्रमों में जलविज्ञान के सिद्धांत, जल-मौसमविज्ञान, सस्‍यविज्ञान, मृदा भौतिकी, फसल कार्यिकी तथा जल गुणवत्‍ता विषय शामिल हैं। भू-जल प्रबंधन, सिंचाई प्रणालियों के डिजाइन व उनका प्रचालन, मृदा एवं जल संरक्षण, जल संभर प्रबंधन आदि जैसी बहुविषयी निपुणता वाले विषय विशिष्‍ट पाठ्यक्रमों के माध्‍यम से पढ़ाए जाते हैं। इन पाठ्यक्रमों का तीसरा समूह पर्यावरणीय प्रभाव मूल्‍यांकन, सिंचाई परियोजनाओं के नैदानिक विश्‍लेषण, सूचना प्रबंध आदि से संबंधित है। जलविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अन्‍तर्गत पाठ्यक्रमों को निम्‍नानुसार सूचीबद्ध किया गया है :

पाठ्यक्रम संख्‍या    पाठ्यक्रम का नाम                क्रेडिट      ट्राइमेस्‍टर   

डब्‍ल्‍यूएसटी 100           जल संसाधन प्रबंध- I                   3 एल + 0 पी       I

डब्‍ल्‍यूएसटी 101            जल दबाव के मूल तत्‍व                 2 एल + 1 पी       I

डब्‍ल्‍यूएसटी 102           मृदा-जल-पादप-पर्यावरण प्रणालियां        2 एल + 1 पी       II

डब्‍ल्‍यूएसटी 103           जल प्रबंध के सामाजिक-आर्थिक पहलू    

डब्‍ल्‍यूएसटी 200           जल संसाधन प्रबंध- II                  2 एल + 1 पी       III

डब्‍ल्‍यूएसटी 201           फसल की जल संबंधी आवश्‍यकताएं       2 एल + 1 पी       III

                        तथा सिंचाई नियोजन

डब्‍ल्‍यूएसटी 202/पीपी 250 प्रतिबल कार्यिकी                        2 एल + 1 पी         I

डब्‍ल्‍यूएसटी 203           जल उपयोग का आर्थिक विश्‍लेषण        2 एल + 0 पी        II

डब्‍ल्‍यूएसटी 204           मृदा जल गुणवत्‍ता एवं सिंचाई           2 एल + 1 पी       II

डब्‍ल्‍यूएसटी 205/एई 251   मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी        3 एल                 I

डब्‍ल्‍यूएसटी 206/एई 252   जल संभर प्रबंध                       3 एल + 1 पी       III  

डब्‍ल्‍यूएसटी 207           सिंचाई परियोजना के पर्यावरणीय         3 एल             III

                        प्रभावों का मूल्‍यांकन

डब्‍ल्‍यूएसटी 208           नैदानिक विश्‍लेषण तथा सिंचाई           1 एल + 1 पी            II

                        परियोजनाओं के निष्‍पादन का मूल्‍यांकन

प्रशिक्षण

      एम.एससी. और पीएच.डी. कार्यक्रम के अतिरिक्‍त जल प्रौद्योगिकी केन्‍द्र में कृषि से संबंधित जल प्रबंधन के विभिन्‍न पहलुओं पर नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम मूलत: बहुविषयी प्रकृति के होते हैं तथा 2-3 दिन से लेकर 3 महीने की अवधि तक चलते हैं। यह अवधि प्रशिक्षार्थियों की आवश्‍यकता पर निर्भर करती है। अधिकांश प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्‍य तथा केन्‍द्र सरकार के संगठनों व विश्‍व बैंक, डब्‍ल्‍यूएचओ और यूएसएआईडी जैसी बाहरी एजेन्सियों द्वारा प्रायोजित किये जाते हैं।

      कृषि मंत्रालय ने 1989 में केन्‍द्र के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सबल बनाने के लिए जल प्रौद्योगिकी केन्‍द्र में जल प्रबंधन प्रौद्योगिकी पर एक प्रगत प्रशिक्षण केन्‍द्र स्‍थापित किया था जिसे अब जल प्रबंधन प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण में श्रेष्‍ठता का केन्‍द्र नाम दिया गया है। पिछले अनेक वर्षों के दौरान जल प्रौद्योगिकी केन्‍द्र में कुल 130 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गए जिनमें केन्‍द्र व राज्‍य के विभिन्‍न सरकारी संगठनों/कृषि विश्‍वविद्यालयों, डब्‍ल्‍यूएएलएमआईएस, भा.कृ.अ.प. के संस्‍थानों आदि से लगभग 2500 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्‍त किया।

केन्‍द्र में चलाए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं :

      व्‍यवसायविद् शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार कर्मियों के लिए सेवा के दौरान दिये जाने वाले प्रशिक्षण सहित सिंचाई विभागों तथा जल वितरण संबंधी अन्‍य एजेन्सियों की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञतापूर्ण अल्‍पावधि पाठ्यक्रम।

  • प्रशिक्षण के श्रेष्‍ठता के केन्‍द्र के अन्‍तर्गत कृषि मंत्रालय द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रशिक्षण कार्यक्रम स्‍टेकहोल्‍डरों की आवश्‍यकताओं पर निर्भर करता है और निम्‍न क्षेत्रों पर ये प्रशिक्षण दिये जाते हैं :

  • फार्म सिंचाई प्रणालियों की डिजाइन व उनका अनुप्रयोग
  • भूमि जल निकासी
  • जलभरों (एक्‍वाफायर) विश्‍लेषण तथा कुओं की डिजाइन
  • मृदा-जल-पादप-वातावरण संबंध
  • जल गुणवत्‍ता और मृदा लवणता
  • सिंचाई का अर्थशास्‍त्र तथा जल संस्‍थाएं
  • जलसंभर प्रबंध