पिछले दशक की प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियां

फसल सुधार

  • अंगूर के दो संकर नामत: पूसा उर्वशी और पूसा नवरंग जारी किए गए हैं।
  • एक विदेशी आम की किस्‍म ‘एल्‍डन’ तथा संकर ‘एच-13-1’ (आम्रपाली X सेनसेशन) की जारी किये जाने के लिए पहचान की गई है तथा पिछले पांच वर्षों से इसका अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के माध्‍यम से जारी किये जाने के लिए मूल्‍यांकन किया जा रहा है।
  • नींबू का एक चयन जिसके फल गुच्‍छों में लगते हैं, उत्‍तर भारतीय स्थितियों में जारी किये जाने के लिए पहचाना गया है।
  • बेर में चूर्णिल फंफूद तथा फल मक्‍खी के प्रतिरोध के स्रोतों की पहचान की गई है जैसे सनौर झज्‍जर की चूर्णिल फंफूद के लिए तथा तिकड़ी की फल मक्‍खी के लिए।
  • अनार के जननद्रव्‍यों का एक अच्‍छा संकलन तैयार किया गया है। इसकी किस्‍म ज्‍योति को उत्‍तर भारतीय स्थितियों में आशाजनक पाया गया है।
  • पुमेलो को ‘कागज़ी कलां’ नींबू का सर्वश्रेष्‍ठ परागक पाया गया है जिसके कारण वृक्ष में अधिक फल लगते हैं व पैदावार भी अधिक होती है।

मूलवृन्‍त अनुसंधान तथा उच्‍च घनत्‍व वाली रोपाई

  • आम्रपाली आम, किन्‍नू मेंडारिन तथा इलाहाबादी सफेदा अमरूद में उच्‍च घनत्‍व वाली रोपाई से जुड़ी प्रौद्योगिकियों का अनेक किसानों के समक्ष प्रदर्शन किया गया है।
  • किन्‍नू मेंडारिन के मामले में ट्रॉयर सिट्रेन्‍ज, कर्ण खट्टा और सोसरकार की बौने, अर्ध बौने तथा पुष्‍ट मूलवृन्‍तों के रूप में पहचान की गई है।
  • अमरूद की इलाहाबादी सफेदा किस्‍म के लिए बौने मूलवृन्‍त के रूप में अगुणित संख्‍या 82 की कार्यकुशलता का प्रदर्शन किया गया।
  • जि़जीफस न्‍यूमोलेरिया को बेर के बौनाकरण मूलवृन्‍त के रूप में पहचाना गया।
  • ‘कुरुकन’ को आम के लवण सहिष्‍णु मूलवृन्‍त के रूप में पहचाना गया।

बाग प्रबंध तथा पौधा प्रवर्धन

  • ‘आम्रपाली’ किस्‍म के अनुत्‍पादक आम के बागों में छटाई की तकनीकों का मानकीकरण किया गया है ताकि इन बागों से पुन: फल प्राप्‍त हो सके।
  • किन्‍नू मेंडारिन में उच्‍च घनत्‍व वाले बागों की पोषण आवश्‍यकताओं का मानकीकरण किया गया है।
  • नींबू वर्गीय फलों और आम में जैव उर्वरकों की दक्षता का प्रदर्शन किया गया।
  • अंगूरों में गुणवत्‍ता सुधार के लिए जैव-नियामकों के उपयोग का मानकीकरण किया गया है।
  • बारम्‍बार सूक्ष्‍म-कलमों के माध्‍यम से अंगूर में प्रगुणन तकनीक मानकीकृत की गई है।
  • न्‍यूसेलस ऊतक तथा कायिक भ्रूण जनन से आम में संवर्धन स्‍थापित किये गए हैं। 
  • आम की अपरुपित मंजरियों से चूसी कोकिन जो एक पादप विषाक्‍त तत्‍व है, को पहचाना गया है।

कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी

  • आम की वाणिज्यिक किस्‍मों को कम तापमान पर भंडारण के दौरान बढ़ी हुई कार्बन डाइऑक्‍साइड पर रखने की तुलना में कम ऑक्‍सीजन वाले नियंत्रित वातावरण में रखना भंडारण की दृष्टि से बेहतर पाया गया है।
  • भंडारण में निम्‍न सापेक्ष आर्द्रता की स्थितियों (60 प्रतिशत) में अल्‍फांसों आमों को 11 डिग्री सैल्सियस के तापमान पर भंडारित करने से उनमें शीत क्षति आरंभ होती देखी गई।
  • कर्ण खट्टा मूलवृन्‍त पर रोपे गए वृक्षों से प्राप्‍त फल बेहतर भौतिक गुणों से युक्‍त थे तथा उनमें ट्रायर सिट्रेन्‍ज मूलवृन्‍तों पर रोपी गई कलमों की तुलना में रस की मात्रा भी अधिक थी।
  • निर्यात बाजार के लिए सिलिकॉन झिल्‍ली प्रणाली का उपयोग करके स्‍ट्राबेरी तथा केला की पैकिंग की रुपांतरित वातावरण (एमए) पैकेजिंग प्रौद्योगिकी मानकीकृत की गई।
  • आलुओं को वाष्‍पशील शीत कक्ष में भंडारित करने पर उनकी बाजार में बिक्री की अवधि 2 से 3 माह तक सफलतापूर्वक बढ़ाई गई।
  • गुलाब के कर्तित फूलों को अल्‍पावधि तक भंडारित करने में शीत कक्ष को बहुत प्रभावी पाया गया। इससे गुलाबों के कटाई उपरांत गुण बरकरार रहते हैं तथा उन्‍हें बाजार में बेचकर बेहतर लाभ कमाया जा सकता है।
  • संस्‍थान द्वारा विकसित ग्‍लेडियोलस की किस्‍म सुनयना ने 4 सप्‍ताह तक 85 से 90 प्रतिशत सापेक्ष आर्द्रता और 4 डिग्री सैल्सियस पर भंडारण के दौरान इस रूपांतरित वातावरण की पैकेजिंग के प्रति बहुत अच्‍छी प्रतिक्रिया प्रदर्शित की।
  • टमाटर के संकर/किस्‍म नामत: एचवाईटीएच-2, पंजाब छुआरा, सीओ3, दिल्‍ली उपहार और पूसा गौरव टमाटर के रस तथा अन्‍य प्रसंस्‍कृत उत्‍पादों के उत्‍पादन की दृष्टि से सर्वश्रेष्‍ठ पाए गए।
  • गलगल, अदरक और आंवला के रस को नींबू के रस में मिलाकर फल आधारित कार्बनिक पेय तैयार किये गए हैं।
  • फल आधारित कार्बनिक पेय को पूसा परिसर के आउटलेटों से बिक्री के लिए तैयार किया गया है।
  • कार्बनिककृत फलों के रस के पेय तैयार करने के लिए एक निजी पार्टी को परामर्श सेवाएं प्रदान की गई हैं।
  • आंवला उत्‍पादों में सफेद धब्‍बे पड़ने का कारण म्‍यूसिक अम्‍ल (डी-गैलेकेरिक अम्‍ल) पाया गया है। इसे नियंत्रित करने के उपाय खोजे गए हैं ताकि आंवले से सफलतापूर्वक आचार बनाया जा सके और उसे परिरक्षित किया जा सके।
  • अंगूर के रंगीन संकर, पूसा नवरंग को पेय तैयार करने की दृष्टि से श्रेष्‍ठ पाया गया है जबकि एक अन्‍य संकर (एच-4-3-82) परासरणीय निर्जलीकरण (किशमिश बनाने के लिए) बेहतर पाया गया है।
  • परासरणीय विधि से सुखाई गई सेब की फांकों को तैयार करने, उन्‍हें पैक करने तथा भंडारित करने की विधि मानकीकृत की गई है और विभिन्‍न उपभोक्‍ता पैकों में तत्‍काल खाने के लिए उपयुक्‍त आम की चटनी के लिए मिक्‍स का उत्‍पादन किया गया है।
  • आम की दशहरी और लंगड़ा किस्‍मों के पूर्णत: परिपक्‍व फलों से उनकी तुड़ाई के क्रमश: छठे और चौथे दिन सूखी आम की फांकें तैयार की जा सकती हैं जिनकी गुणवत्‍ता बेहतर होती है।
  • अंजीरों के निर्जलीकरण, पैकेजिंग और भंडारण की प्रक्रिया मानकीकृत की गई है।
  • फलों और सब्जियों को सुखाने के लिए टेंट के प्रकार का एक फोल्‍ड हो सकने वाला सौर शुष्‍कक विकसित किया गया है।

विकसित प्रौद्योगिकियां

      परामर्शदायी सेवाओं के अन्‍तर्गत संभाग द्वारा निम्‍नलिखित प्रौद्योगिकियां उपलब्‍ध कराई गई हैं : 

  • किन्‍नू मेंडारिन में उच्‍च घनत्‍व वाले बागों की स्‍थापना
  • आम्रपाली आम में उच्‍च घनत्‍व वाले बागों की स्‍थापना
  • टेकली आम
  • आम के पुराने वृक्षों की उत्‍पादकता सुधारने की प्रौद्योगिकी
  • उत्‍तर भारतीय स्थितियों के अन्‍तर्गत अंगूर के फलों की गुणवत्‍ता को सुधारने की प्रौद्योगिकी
  • फालसा में समरूप परिपक्‍वन
  • आम, अंगूर, नींबू वर्गीय फलों, स्‍ट्राबेरी, बेर तथा फालसा के नए बागों की स्‍थापना
  • फल आधारित कार्बनिक पेयों के उत्‍पादन के लिए प्रौद्योगिकियां
  • सब्जियों तथा कच्‍चे आम की फांकों के परिरक्षण के लिए प्रौद्यो‍गिकियां
  • संपूर्ण टमाटर का गूदा तैयार करने की प्रौद्योगिकी बागवानी फसलों के उत्‍पादों के भंडारण के लिए वाष्‍पशील शीत कक्ष की कम लागत वाली प्रौद्योगिकी