डॉ. वी. आर. सागरखाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी संभाग
अध्यक्ष
फोन : 011-25842155
फैक्स : 011-25842155
ई-मेल : head_pht[at]iari[dot]res[dot]in, vrsagar_pht[at]iari[dot]res[dot]in

 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भा.कृ.अ.सं., नई दिल्ली के कृषि अभियांत्रिकी संभाग में 70 के दशक के आरंभ में कृषि अभियंताओं के सहयोग से कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना शुरु की थी। सत्तर के दशक के अंत में इस संस्थान के फल एवं औद्यानिक प्रौद्योगिकी संभाग में स्थित पीएल 480 की निधियों से शीघ्र नष्ट होने वाले फलों व सब्जियों की कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी पर एक अन्य समन्वित परियोजना आरंभ की गई। 1980 के दशक के अंत में इस परियोजना के पूर्ण होने के पश्चात इसे छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान बागवानी फसलों की कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के रूप में प्रौन्नत किया गया और इसके आठ केन्द्र स्थापित किए गए (भा.कृ.अ.प. और राज्य कृषि विश्वविद्यालय प्रत्येक में चार)। बागवानी फसलों पर कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना 1983 में बुनियादी सुविधाओं के विकास, अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा प्रौद्योगिकी सृजन के लिए आरंभ की गई जिससे फलों, सब्जी और फूलों की जीर्णन आयु तथा गुणवत्ता में वृद्धि की जा सके और साथ ही घरेलू तथा निर्यात संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भा.कृ.अ.प. ने फलों व सब्जियों की कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी पर भारत-यूएसएआईडी उप परियोजना को स्वीकृति प्रदान की जिसका मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण सात फलों और सब्जियों नामत: टमाटर, केला, नींबूवर्गीय फलों, अमरूद, आलू, प्याज और टमाटर की कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान प्रयासों को गहन करना था। इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य कटाई, फार्म पर साज-संभाल, भंडारण, विपणन, परिवहन और प्रसंस्करण के दौरान फलों एवं सब्जियों में कटाई उपरांत क्षतियों को कम करना था। इस परियोजना से बड़ी संख्या में अत्याधुनिक उपकरण खरीदने तथा प्रयोगशाला संबंधी सुविधाओं को सुधारने में सहायता मिली। इस परियोजना का वास्तविक कार्यान्वयन अक्तूबर 1985 में हुआ और एक वर्ष के विस्तार सहित यह परियोजना 3 मार्च 1991 को समाप्त हुई। वर्ष 2002 में जब तक यह इस संस्थान का स्वतंत्र संभाग नहीं बन गया, तब तक यह फल एवं औद्यानिकी प्रौद्योगिकी संभाग की कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी इकाई के रूप में कार्य करता रहा। बहु-विषयी दृष्टिकोण के साथ कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी संभाग की स्थापना नौवीं पंचवर्षीय योजना में 5 फ़रवरी 2002 में की गयी और कलेंडर वर्ष 2004-05 में एम. एस. सी. व पी.एच. डी. उपाधि हेतु अलग से अध्यापन विषय की शुरुआत हुई | यह संभाग 01-07-2010 में फल एवं प्रौद्योगिकी संभाग से नाभिकीय अनुसंधान प्रयोगशाला भवन में स्थानांत्रित हुआ | नवंबर 2013 में संभाग का नाम डॉ. वी. आर. सागर की अध्यक्षता में कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी संभाग से बदलकर खाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी संभाग रखा गया | संभाग का मिशन बागवानी फसलों में फसलोत्तर क्षतियों को कम करना और उनका मूल्यवर्धन करना है ताकि घरेलू स्तर पर अधिक उपयोग हो और निर्यात को बढ़ावा मिले। हमारे अधिदेश हैं :

 

  • उत्पादन एवं फसलोत्तर साज-संभाल का समेकन
  • मूल्यवर्धित उत्पादों एवं उनकी पैकेजिंग तथा भंडारण संबंधी आवश्यकताओं के लिए उचित भंडारण प्रणालियों व मूल्यवर्धन संबंधी प्रक्रियाओं का विकास।
  • मास्टर और डॉक्टर स्तरों पर खाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, पोस्ट डॉक्टरल कार्यक्रमों के साथ-साथ विभिन्न स्तरों पर अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन।
  • प्रसार संबंधी क्रियाकलाप, विकसित की गई प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण एवं परामर्शदायी सेवाएं उपलब्ध कराना।