आनुवंशिकी विभागडॉ. ए. के. सिंह
अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक

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उत्पत्ति  एवं  विकास

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा का देश का एक उत्कृष्ट केंद्र है। इस संस्थान का आनुवंशिकी संभाग जिसे व्यापक रूप से भारत में "हरित क्रांति जननी" माना जाता है, इस संस्थान के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। इस संभाग की स्थापना 1960 में हुई थी। अपने आरंभिक काल से ही इस संभाग में विभिन्न फसलों के मौलिक, कार्यनीति परक और व्यावहारिक अनुसंधान तथा आनुवंशिक और पादप प्रजनन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान किए हैं। डॉ. बी.पी.पाल, डॉ. एम.एस.स्वामीनाथन, डॉ. ए.वी.जोशी, डॉ. एच.के.जैन और डॉ. वी.एल.चोपड़ा जैसे अनेक ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों ने इस संस्थान के आनुवंशिकी संभाग को आनुवंशिकी और पादप प्रजनन से संबंधित शिक्षण और अनुसंधान के एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित होने की दिशा में अविस्मरणीय योगदान दिया है।

आनुवंशिकी संभाग में भारत के और विदेश के अनेक स्नातकोत्तर छात्रों को शिक्षा प्रदान की गई है। इस संस्थान के भूतपूर्व छात्र उच्च ख्यातिप्राप्त आनुवंशिक विदों और पादप प्रजनकों के रूप में विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों में या तो कार्य कर चुके हैं या कार्यरत हैं। उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधनों के विकास के अपने प्रयास में संभाग ने स्नातकोत्तर शिक्षा एवं अनुसंधान कार्यक्रमों को फसल आनुवंशिकी एवं प्रजनन के क्षेत्र में हुए नवीनतम विकासों को ध्यान में रखते हुए निरंतर अद्यतन बनाए रखा है।

अधिदेश

  • खेत फसलों की आनुवंशिक वृद्धि के लिए मौलिक एवं कार्यनीतिपरक अनुसंधान
  • विभिन्न खेत फसलों का व्यावहारिक अनुसंधान की दृष्टि से/किस्मगत विकास
  • संभाग द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण
  • स्नातकोत्तर शिक्षा एवं अनुसंधान/मानव संसाधन विकास
  • अनुसंधान के पारस्परिक क्षेत्रों में राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोगी संपकों का विकास और उन्हें सबल बनाना तथा स्नातकोत्तर शिक्षा।


संपर्क एवं नेटवर्किंग

भा.कृ.अ.सं. क्षेत्रीय केन्द्र : संस्थान के अन्य संभागों से सम्पर्क बनाए रखने के अतिरिक्त आनुवंशिकी संभाग ने पूसा (बिहार), शिमला (हिमाचल प्रदेश), करनाल (हरियाणा), इंदौर (मध्य प्रदेश), वेलिंग्टन और अदुथुरई (तमिल नाडु) और धारवाड़ (कर्नाटक) के साथ खेत फसलों में शटल प्रजनन के अतिरिक्त कार्यनीतिपरक अनुसंधान करने के लिए प्रभावी संपर्क बनाए हुए हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं

आनुवंशिकी संभाग ने रूचि के पारस्परिक क्षेत्रों में अनुसंधान कार्यक्रमों को सबल बनाने के लिए उच्च ख्यातिप्राप्त अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और देश के संस्थानों के साथ संपर्क और नेटवर्किंग स्थापित की है। इन संपर्कों से, विशेषकर, अग्रणी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संभाग में मानव संसाधन का विकास करने में उल्लेखनीय योगदान हुआ है।

अवसंरचना तथा अन्य सुविधाएं

  • प्रयोगशाला सुविधाएं : अनाजों और तिलहनों के लिए "गुणवत्ता मूल्यांकन प्रयोगशालाओं" के अतिरिक्त संभाग आण्विक प्रजनन का कार्य करने के लिए भली भांति सुसज्जित प्रयोगशालाओं की सुविधाओं से युक्त है। इन प्रयोगशालाओं में उपलब्ध उपकरणों में शामिल हैं अल्ट्रासेंट्रीफ्यूग, उच्च गति के रेफ्रिजरेटिड सेंट्रिफ्यूग, पीसीआर यंत्र, स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, टेंसिटोमीटर, आइस-फ्लेकिंग मशीनें, डीप फ्रीजर (-800से. और -200से.) आदि। संभाग में फ्लोरोसेंट माइक्रोस्कोप जिनमें फोटोग्राफी की सुविधा है, स्टीरियोज़ूम माइक्रोस्कोप, माइक्रोमेनिपुलेटर और माइक्रोफोटोग्राफ डेवलप करने और प्रिंट लेने के लिए एक डार्क रूम भी उपलब्ध है। जनरेटर तथा यूपीएस सुविधाओं से पावर बैक अप उपलब्ध कराया जाता है।
  • कम्प्यूटर कोष्ठ : इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा मल्टीमीडिया सुविधाओं से युक्त कम्प्यूटर वैज्ञानिकों, प्रशासनिक स्टाफ और छात्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
  • संभागीय पुस्तकालय, इस पुस्तकालय में आनुवंशिकी, कोशिकानुवंशिकी, पादप प्रजनन, आण्विक जीवविज्ञान एवं जैवप्रौद्योगिकी पर 2000 से अधिक पुस्तकों के अलावा जरनल, वार्षिक समीक्षाएं, न्यूज लैटर्स तथा संभाग के वैज्ञानिकों के प्रकाशनों के रिप्रिंट उपलब्ध हैं।
  • संभागीय संग्रहालय : वर्ष 1960 अर्थात् आनुवंशिकी संभाग की स्थापना के समय से लेकर अब तक इस संभाग की अनुसंधान एवं शिक्षण उपलब्धियों को दर्शाने वाला एक संग्रहालय भी है।
  • सेमिनार कक्ष : एलसीडी प्रोजेक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक ओएचपी जैसी आधुनिक दृश्य-श्रव्य सुविधाओं से युक्त एक वातानुकूलित सेमिनार कक्ष भी उपलब्ध है।
  • व्याख्यान कक्ष/प्रयोगात्मक प्रयोगशाला : स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए ओएचपी तथा प्रायोगिक प्रयोगशाला से युक्त एक व्याख्यान कक्ष भी इस संभाग में है।

सामान्य सुविधाएं :

संभाग के स्टाफ की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फोटोस्टेट तथा इलेक्ट्रॉनिक डुप्लीकेशन सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं।


व्यावसायिक सोसायटियां:

  • संभाग में इंडियन सोसायटी ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग स्थापित है।
  • इस सोसायटी द्वारा इंडियन जरनल ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग प्रकाशित किया जाता है।