फल और बागवानी संभागडॉ. एस. के. सिंह
अध्यक्ष
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वर्ष 1956 में गठित औद्यानिकी संभाग की स्थापना हुई थी और 1970 में इसके विभाजन के पश्चात फल एवं औद्यानिक प्रौद्योगिकी संभाग की स्थापना हुई। तबक से लेकर अब तक यह संभाग औद्यानिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं स्नातकोत्तर शिक्षा का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है। संभाग का मुख्य कार्य विभिनन फल वाली फसलों का उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अनुसंधान करना व विभिन्न बागवानी उत्पादों के लिए कारगर कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। पिछले तीन दशकों के दौरान संभाग ने औद्यानिकी की प्रगति में अनुसंधान के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान दिया है और ऐसा फलदार फसलों में अग्रणी ज्ञान को उन्नत करके व फल उद्योग के समक्ष आने वाली समस्याओं के व्यावहारिक हल उपलब्ध कराकर किया गया है। इस संभाग में अनुसंधान संबंधी क्रियाकलाप निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखकर चलाए जाते हैं :

  • उद्योग और निर्यात के लिए उपयुक्त आम, अंगूर और बेर की उपज बढ़ाने, उनमें बेहतर गुणवत्ता लाने तथा जैविक प्रतिबलों के विरुद्ध प्रतिरोध का संचार करने के लिए संकरीकरण एवं संकरों का मूल्यांकन
  • नवीन किस्मों के प्रजनन व उनके विकास के लिए आम, अंगूर, बेर तथा अनार के जननद्रव्य को बढ़ाना, उसका अनुरक्षण और मूल्यांकन।
  • बौने संकरों, बौनापन लाने वाले मूल वृंतों की पहचान, वितान प्रबंध तथा अन्य सस्यविज्ञानी क्रियाओं के माध्यम से किन्नो संतरा, बेर और अमरूद में उच्च घनत्व वाली बागवानी की स्थापना।
  • नींबूवर्गीय फलों, आम तथा अंगूर में फलों की गुणवत्ता में सुधार के लिए और अकार्बनिक स्रोतों के स्थान पर कार्बनिक या जैविक स्रोतों का उपयोग करने के लिए जैव-उर्वरकों को लोकप्रिय बनाना।
  • टिकाऊ उत्पादन के लिए गौण एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का अनुप्रयोग करते हुए अंगूर एवं नींबूवर्गीय फलों की फल गुणवत्ता में सुधार।
  • विभिन्न प्रकार के मूलवृंत जीनप्ररूपों के संकलन, मूल्यांकन व उनकी पहचान के माध्यम से आम उत्पादन में लवणता संबंधी समस्याओं से निपटना।
  • आम में राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं जैसे अपरूपण रोग तथा एक वर्ष छोड़कर अगले वर्ष फल आना से निपटने के लिए इनके कारणों को समझना और इनमें कमी लाने के लिए उपयुक्त तकनीकें विकसित करना।
  • अंगूर, आम तथा अमरूद में परखनली प्रवर्धन की युक्तियां विकसित करना तथा भ्रूण बचाव के माध्यम से आम और अंगूरों में नई संततियों का विकास करना।
  • ताजे फलों, सब्जियों और पुष्पों की कटाई उपरांत साज-संभाल, उनकी पैकिंग व भंडारण के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियां विकसित करना।
  • फलों और सब्जियों में नए परिरक्षण उत्पादों को उत्पन्न करना तथा परिरक्षण की विभिन्न विधियां विकसित करना।
  • बागवानी के दौरान उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट पदार्थ के उपयोग की नई विधियां विकसित करना और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करना।

इस संभाग में नियमित रूप से फील्ड प्रदर्शनों के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाते हैं जिसके लिए खेत भ्रमणों का आयोजन किया जाता है और साथ ही फल उगाने वालों व प्रसंस्करण कर्ताओं के लाभ के लिए प्रसार प्रपत्र/फोल्डर भी तैयार किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त स्नातकोत्तर शिक्षा के माध्यम से तथा फल वाली फसलों में उत्पादन एवं कटाई उपरांत प्रबंधन के अग्रिम क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके औद्यानिकी अनुसंधान के लिए मानव संसाधन विकास पर अत्यधिक बल दिया जाता है।