भा.कृ.अ.सं. में प्रतिवर्ष फरवरी माह में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष आयोजित मेले में भा.कृ.अ.सं. द्वारा विकसित विभिन्‍न प्रौद्योगिकियों को मुख्‍य पंडाल में दर्शाया गया जहां प्रगतिशील किसानों ने भा.कृ.अ.सं. की प्रौद्योगिकियों के बारे में अपने अनुभवों को संस्‍थान के वैज्ञानिकों और मेले में आने वाले अन्‍य किसानों के साथ बांटा। संस्‍थान के विभिन्‍न परियोजना निदेशालयों, संभागों और इकाइयों ने अपने स्‍टॉलों पर अपनी-अपनी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। संस्‍थान के अलावा विभिन्‍न राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों, भा.कृ.अ.परिषद् के संस्‍थानों जिनमें कुछ पशुधन से संबंधित अनुसंधान संस्‍थान भी शामिल थे, निजी कम्‍पनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों व स्‍वयंसेवी संगठनों/सोसायटियों ने अपने स्‍टॉल लगाकर इस मेले में भाग लिया। इसके अतिरिक्‍त आउटरिच प्रसार क्षेत्रों के कुछ प्रगतशील किसानों ने अपने स्‍टॉल लगाए और अपने कृषि उत्‍पादों की बिक्री की।

    प्रतिवर्ष इस मेले को देखने देश के विभिन्‍न भागों से हजारों किसान, खे‍तीहर महिलाएं, छात्र, प्रसारकर्मी, उद्यमी तथा अन्‍य लोग आते हैं। किसानों को संस्‍थान के फार्मों में लगी फसलों के सजीव प्रदर्शन दिखाए गए। उन्‍हें संरक्षित कृषि प्रौद्योगिकी केन्‍द्र तथा संस्‍थान के फार्म पर लगे अन्‍य प्रयोगों को दर्शाया गया। मेले में शाम के समय किसान गोष्ठियां आयोजित की गईं जहां किसानों ने संस्‍थान/राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों/भा.कृ.अ. परिषद् के अन्‍य संस्‍थानों के वैज्ञानिकों के साथ अपनी समस्‍याओं पर चर्चा की व उनके हल प्राप्‍त किए।

भा.कृ.अ.सं. कृषि विज्ञान मेला -2011

    इस वर्ष आयोजित कृषि विज्ञान मेले का मुख्‍य विषय 'अधिक उत्‍पादकता एवं आय के लिए फार्म प्रौद्योगिकियां' था। यह मेला संस्‍थान में 3-5 मार्च 2011 को आयोजित किया गया। मेले का उद्घघाटन 3 मार्च 2011 को पूर्वाह्न 9.30 बजे भारत सरकार के कृषि एवं खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍य मंत्री श्री हरीश रावत ने किया। माननीय कृषि राज्‍य मंत्री श्री अरुण एस. यादव ने उद्घघाटन समारोह की अध्‍यक्षता की। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महा-निदेशक डॉ. एस. अय्यप्‍पन माननीय अतिथि थे जबकि भा.कृ.अ.परिषद् के उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. स्‍वप्‍न के. दत्‍ता और उप-महानिदेशक (प्रसार) डॉ. के.डी. कोकाटे विशेष अतिथि थे। इस अवसर पर डॉ. एस. अय्यप्‍पन ने स्‍वागत भाषण दिया। मेले की स्‍मारिका के अतिरिक्‍त इस अवसर पर 'बढ़ी हुई उत्‍पादकता एवं लाभ के लिए प्रौद्योगिकीय विकल्‍प' शीर्षक के एक तकनीकी बुलेटिन का विमोचन किया गया।

    अधिक उत्‍पादकता एवं आय के लिए भा.कृ.अ.सं. द्वारा विकसित फार्म प्रौद्योगिकियों का एक बड़े पंडाल में प्रदर्शन किया गया। संस्‍थान के विभिन्‍न परियोजना निदेशालयों, संभागों, केन्‍द्रों और इकाइयों ने भी अपने स्‍टॉलों पर अपनी-अपनी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में लगभग 200 स्‍टॉल लगाए गए। संस्‍थान के 34 स्‍टॉलों के अतिरिक्‍त राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों के 5, पशुधन आधारित कुछ अनुसंधानों सहित भा.कृ.अ.परिषद् के संस्‍थानों के 28, कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के 4, निजी कम्‍पनियों और स्‍वयंसेवी संगठनों के 70 व सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के 12 स्‍टॉल थे जिनमें प्रौद्योगिकियों/उत्‍पादों का प्रदर्शन किया गया या उनकी बिक्री की गई। संस्‍थान के प्रसार प्रचालिनी क्षेत्रों के 22 प्रगतिशील किसानों ने अपने फार्म उत्‍पादों की बिक्री व प्रदर्शन के लिए अपने स्‍टॉल लगाए। मेले में विभिन्‍न कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को नि:शुल्‍क परामर्श सेवाएं प्रदान की गईं। लगभग 1,00,000 आगन्‍तुक इस मेले में आए जो देश के 22 राज्‍यों नामत: उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली, राजस्‍थान, बिहार, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, छत्‍तीसगढ़, जम्‍मू और काश्‍मीर, झारखण्‍ड, आन्‍ध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तमिल नाडु, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, गुजरात, उत्‍तराखंड, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैण्‍ड आदि से आए थे। इनमें किसान, खेतीहर महिलाएं, छात्र, प्रसार कार्यकर्ता, उद्यमी तथा अन्‍य लोग शामिल थे। इस मेले का देखने नेपाल और स्विटज़रलैण्‍ड से विदेशी भी आए।

    विभिन्‍न विषयों पर किसानों-वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों के बीच पारस्‍परिक चर्चा के लिए 3, 4 और 5 मार्च को तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। अधिक उत्‍पादकता एवं आय के लिए फसल आधारित प्रौद्योगिकियों पर 3 मार्च को आयोजित पहले तकनीकी सत्र में कृषि वैज्ञानिक चयन मण्‍डल के अध्‍यक्ष डॉ. सी.डी. मायी मुख्‍य अतिथि थे। भा.कृ.अ.परिषद् के पूर्व उप-महानिदेशक (प्रसार) डॉ. सी. प्रसाद ने इस सत्र की अध्‍यक्षता की। कृषि एवं सहकारिता विभाग के अपर-सचिव डॉ. आशीष बहुगुणा, भा.कृ.अ.परिषद् के उप-महानिदेशक (अभियांत्रिकी) डॉ. एम.एम. पाण्‍डेय तथा टिकाऊ कृषि के लिए सिंजेन्‍टा फाउंडेशन के अध्‍यक्ष डॉ. मार्टिन टेलर इस सत्र में सम्‍मानीय अतिथि थे।

    महिला सशक्तिकरण कार्यशाला की मुख्‍य अतिथि भा.कृ.अ. परिषद् की उप-महानिदेशक (मात्स्यिकी) डॉ. (श्रीमती) बी. मीनाकुमारी थीं। इस कार्यशाला की अध्‍यक्षता योजना आयोग के सलाहकार डॉ. वी.वी. सदामते ने की। लेडी इर्विन कॉलेज की निदेशक डॉ. अनुपमा सिद्धू और भा.कृ.अ.सं. की संयुक्‍त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. मालविका दादलानी इस कार्यशाला में सम्‍मानीय अतिथि थीं। प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य चेतना और क्षमता निर्माण के माध्‍यम से महिला सशक्तिकरण पर व्‍यापक विचार-विमर्श हुआ। एक कृषि उद्यमी उजावा, नजफगढ़ ब्‍लॉक, दिल्‍ली की श्रीमती कृष्‍णा यादव और उत्‍तराखंड के रानीचुरी गांव की श्रीमती भगवानी देवी ने ग्रामीण व खेतीहर महिलाओं के साथ अपने अनुभव बांटे। इस कार्यशाला में देश के विभिन्‍न भागों से आईं 5000 से अधिक खेतीहर महिलाओं और किसानों ने भाग लिया। 4 तारीख को अपराह्न में अधिक आय व रोजगार के लिए बागवानी संबंधी प्रौद्योगिकियां विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के सदस्‍य डॉ. एन.के. त्‍यागी मुख्‍य अतिथि थे। इस सत्र की अध्‍यक्षता भा.कृ.अ.परिषद् के पूर्व उप-महानिदेशक (बागवानी) डॉ. के.एल. चड्ढा ने की और संस्‍थान के पूर्व संयुक्‍त निदेशक (प्रसार) डॉ. पी.एन. माथुर इस अवसर पर सम्‍मानीय अतिथि थे।

    इस वर्ष आयोजित मेले का एक अन्‍य आकर्षण नवोन्‍मेषी किसानों का सम्‍मेलन था जो 5 मार्च को आयोजित हुआ और जिसकी अध्‍यक्षता भा.कृ.अ.परिषद् के उप-महानिदेशक (प्रसार) डॉ. के.डी. कोकाटे ने की। भा.कृ.अ.परिषद् के उप-महानिदेशक (शिक्षा) डॉ. अरविंद कुमार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सलाहकार डॉ. विनीता शर्मा सम्‍मानीय अतिथि थे। इस सम्‍मेलन में देश के विभिन्‍न भागों से आए 18 नवोन्‍मेषी किसानों ने बीजोत्‍पादन, जैविक खेती, फार्म मशीनरी और पशुधन विकास आदि पर अपने अनुभवों को बांटा तथा उन्‍हें सम्‍मानित भी किया गया।

    मेले के दौरान पूसा बीज बिक्री पटल से 30 लाख रूपये मूल्‍य के विभिन्‍न फसलों के उच्‍च उपजशील किस्‍मों के बीज बेचे गए। स्‍टॉलों की बुकिंग, मेले में मार्का में दिए गए विज्ञापनों तथा एमओए आदि से कृषि विज्ञान मेला 2011 से 11,23,500/- रूपये का राजस्‍व सृजित हुआ।

    कृषि विज्ञान मेले का समापन समारोह 5 मार्च 2011 को हुआ जिसमें भारत सरकार के माननीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍य मंत्री श्री हरीश रावत मुख्‍य अतिथि थे। पौधा किस्‍म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्‍ली के अध्‍यक्ष, डॉ. पी.एल. गौतम ने समापन समारोह की अध्‍यक्षता की। डॉ. ए.के. श्रीवास्‍तव, निदेशक, राष्‍ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्‍थान, करनाल; डॉ. एम.सी. शर्मा, निदेशक, भारतीय पशु चिकित्‍सा अनुसंधान संस्‍थान, इज्‍जतनगर; डॉ. आर.बी. सिंह, अध्‍यक्ष, 'नास' और पूर्व सदस्‍य किसान आयोग तथा ठाकुर रछपाल सिंह, उपाध्‍यक्ष, कृषक बोर्ड, जम्‍मू एवं कश्‍मीर इस अवसर पर सम्‍मानीय अतिथि थे। देश के विभिन्‍न राज्‍यों जैसे महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, तमिल नाडु, आन्‍ध्र प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, उत्‍तर प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि से आए 27 प्रगतिशील किसानों व खेतीहर महिलाओं को कृषि उत्‍पादन में उनकी उत्‍कृष्‍ट नवीनतम खोजों के लिए सम्‍मानित किया गया। मुख्‍य अतिथि ने किसानों को संबोधित किया तथा भाग लेने वाले विभिन्‍न संगठनों व किसानों को पुरस्‍कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए।