जैव रसायन विभाग
डॉ. शैली प्रवीण
अध्यक्ष

फोन : 011-25842038
फैक्स : 011-25842038
ई-मेल: head_biochem[at]iari[dot]res[dot]in

 

जैव-रसायनविज्ञान संभाग की स्थापना नवम्बर 1966 में पादप आण्विक जैविकी, पादप जैव-रसायनविज्ञान और पोषण पर मुख्य बल देते हुए की गई थी। स्थापना काल के समय से ही इस संभाग में शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण की श्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध हैं और फरवरी 1995 से यहां के कार्यों को मान्यता देते हुए भा.कृ.अ.प. ने प्रगत अध्ययन केन्द्र की स्थापना की है। संभाग के अधिदेश हैं :

  • कृषि से संबंधित वर्तमान समस्याओं के संबंध में मूलभूत तथा व्यावहारिक जैव-रसायनविज्ञानी, आण्विक तथा पोषण संबंधी अनुसंधान करना।
  • कुशल मानव संसाधनों के विकास के लिए शिक्षण प्रदान करना और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा भा.कृ.अ.प. के विभिनन संस्थानों के कृषि वैज्ञानिकों को पादप जैव-रसायनविज्ञान एवं आण्विक जीवविज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों में प्रगत तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • शिक्षण के लिए आधुनिक अनुदेशात्मक सहायताओं का विकास
यह संभाग सीएएस के तत्वावधान में अल्पकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आयोजन करके मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से भा.कृ.अ.प. के संस्थानों तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के 300 वैज्ञानिक/संकाय सदस्य लाभान्वित हुए हैं। वर्तमान में वैज्ञानिक समुदाय की संख्या के कम होते हुए भी यह संस्थान पादप –रसायनविज्ञान एवं आण्विक जीवविज्ञान के क्षेत्रों में व्यवहारिक पहलुओं पर मौलिक अनुसंधान कर रहा है जिनमें मुख्य बल लिपिड जैव-संश्लेषण पथ, अजैविक प्रतिबल के प्रति सहिष्णुता तथा अनाजों व तिलहनी फसलों की गुणवत्ता में सुधार पर दिया जा रहा है। जैव-रसायनविज्ञान संकाय 53 क्रेडिटों से युक्त शिक्षण पाठ्यक्रम की शिक्षा देने में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। ये क्रेडिट 16 पाठ्यक्रमों में बंटे हुए हैं जो स्वतंत्र रूप से पढ़ाए जाते हैं जबकि 5 पाठ्यक्रम पादप जैवप्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र के संकाय सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से पढ़ाए जाते हैं।