कृषि रसायन संभागडॉ. अनुपमा
अध्यक्ष

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फैक्स - 011-25843272, 011-25843272
ई-मेल - head_chem[at]iari[dot]res[dot]in, anupama[at]iari[dot]res[dot]in 

कृषि रसायन संभाग की स्थापना 14 नवम्बर 1966 को उस समय हुई जब भारत सरकार कीटनाशक नीति तैयार करने और कीटनाशक अधिनियम बनाने की प्रक्रिया में थी। तब से, राष्ट्रीय प्रणाली द्वारा संदर्भ और उपयोग के लिए संभाग ने कृषि रसायनो पर आम तौर पर और फसल संरक्षण रसायनों के बारे में विशेष रूप से पर्याप्त ज्ञान और जानकारी उत्पन्न की है। वर्तमान मे अपने अस्तित्व के स्वर्ण ज्यंति वर्ष मे संभाग ने कृषि रसायनो जैसे कीट्नाशक और कीट्नाशक सहायक, सुपरअबसोरबेंट हाइड्रोजेल्स और कंपोजिट, नाइट्रीफिकेशन इनहिबिटर्स, हाइब्रिडाइजिंग एजेंट्स, न्यूट्रास्यूटिकल, पौध वृद्धि नियामकों, स्मार्ट एग्रो-इनपुट वितरण प्रणाली, नैनो उत्पाद, कीटनाशक अवशेषों के लिए नई विश्लेषणात्मक विधियां आदि के विकास, निर्माण और सुरक्षा पहलुओं के बहुविध ज्ञानक्षेत्र में राष्ट्रीय महत्व के बुनियादी और व्यावहारिक अनुसंधान की योजना और निष्पादन में एक पथ प्रदर्शक की भूमिका अदा की है।

विभिन्न तकनीकों के लगभग 30 औद्योगिक लाइसेंसों से श्रेयित, संभाग ने संश्लेषित पाइन ऑयल (चीड का तेल), कीटनाशक सिनरजिस्ट, नीम कीटनाशकों (फसल संरक्षण), हाइड्रोजेल्स और संबध्दित उत्पादों (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) और न्यूट्रास्युटिकलस (मानव स्वास्थ्य) पर अपने काम से व्यापक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा प्राप्त की है । संभाग ने सक्रियता वाले संश्लिष्ट और प्राकृतिक अग्रणी अणुओं की समृद्ध संपत्ति विकसित की है और कई तकनीक सत्यापन हेतू विचाराधीन हैं। संभाग द्वारा विकसित जानकारी के आधार पर पीड़कनाशी अवशेषों पर अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजना (पूर्व में कीटनाशक अवशेष के ए.आई.सी.आर.पी.) बनायी गयी थी। 1987 में संभाग द्वारा स्थापित "सोसाइटी ऑफ पेस्टीसाइड सांइस, भारत" संभाग परिसर में स्थित है और पिछले 28 वर्षों से पेस्टीसाइड अनुसंधान जनरल शोध पत्रिका प्रकाशित करती है। देश में कृषि उपज के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सहायता प्रदान करने और उत्कृष्टता के मानव संसाधन को प्रशिक्षित करने के लिए संभाग मे सबसे पहली एन.ए.बी.एल. द्वारा मान्यता प्राप्त कीटनाशक रेफरल प्रयोगशाला की स्थापना की गयी थी।

उच्च ख्याति प्राप्त गुणवत्ता अनुसंधान प्रकाशनों के अलावा संभाग ने बौद्धिक संपदा की महत्वपूर्ण मात्रा (50 से अधिक राष्ट्रीय / अंतरराष्ट्रीय पेटेंट) उत्पन्न की है। राष्ट्रीय अकादमियों की फेलोशिप (आई.एन.एस.ए., एन.ए.ए.एस.), आई.सी.ए.आर., एन.ए.ए.एस., एन.आर.डी.सी., आई.सी.एफ.आर.ई, रसायन और उर्वरक मंत्रालयों, सोसाइटी और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसंधान निधि के प्रतिष्ठित पुरस्कारों द्वारा वैज्ञानिक योगदानों का प्रभाव प्रदर्शित होता है।

संभाग को संयुक्त राष्ट्र के स्रोत की अंतर्राष्ट्रीय निर्देशिका में पर्यावरण संबंधी जानकारी के स्रोत के रूप में पंजीकृत किया गया है। संभाग प्रयोगशालाएं उन्नत उपकरणों से लैस हैं और अनुसंधान एवम शिक्षण के अलावा यहाँ विभिन्न प्रकार की प्रशिक्षण सेवाए भी प्रदान की जाती हैं। 1989 से संभाग को स्वतंत्र रूप से शिक्षण का दर्जा प्रदान किया गया था जिसके अन्तर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान एम. एस सी. व पीएच. डी. की उपाधियॉ प्रदान करता है।

संभाग के निम्नलिखित अनुसंधान प्रादेश हैः

  • संश्लेषित व प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग द्वारा कृषि रसायनों का विकास
  • कृषि रसायनों का संरूपण (फारम्यूलेशन), शोध व विकास
  • कृषि रसायनों का फसलों व फसल उत्पादों में सुरक्षा मूल्यांकन
  • उत्कृष्ठता के मानव संसाधनों का विकास

 

2016 - Golden-Jubilee Year of Division of Agricultural Chemicals

 

 

स्वच्छ भारत अभियान के तहत किये गए कार्यों का विवरण