मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-23, क्रमांक :- 17/2016-17/मंग॰              समयअपराह्न  2.30 बजे              दिनांक: 31-05-2016

बीते सप्ताह का मौसम (25 से 31 मई,2016)

            सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा।30 मई को 6.6 मि.मी वर्षा तथा 31 मई को 10.8 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई।दिन का अधिकतम तापमान 35.2 से 42.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 39.5 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 21.0 से 28.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 25.2  डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 60 से 81 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 32 से 68 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.2 घंटे  प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 8.2 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 8.1 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 6.8 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 8.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 11.0 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओ से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

01-06-16

02-06-16

03-06-16

04-06-16

05-06-16

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

39

40

40

41

41

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

27

28

28

28

28

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

3

1

2

1

1

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

70

65

65

65

65

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

35

30

30

30

30

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

11

15

11

08

10

हवाकीदिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम    

  उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व














साप्ताहिक मौसम पर आधारित
कृषि सम्बंधी सलाह 05 जून, 2016 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओंकृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  1. यह समय हरीमिर्च और बैंगन की पौध बनाने के लिए उपयुक्त है, अतः किसान भाई यह प्रयासकरें कि वे कीट अवरोधी नाई लोन की जाली का प्रयोग करें ताकि रोग फैलाने वाले कीट से पौधो को बचा सकें।
  2. मौसम अगेती फूलगोभी की पौधशाला बनाने के लिए उपयुक्त है।किसान भाईयों से यह सलाह हैकि वे तैयार पौधशाला को कम मोटाई वाली प्लास्टिक (20-30  माइक्रोन) से ढककर सूर्य तापीकरण करें। इस प्रक्रिया से जमीन में रहने वाले जीवाणु, जो पौधे में रोग के कारण होते है वे नष्टहो जाते है। बीजों को केप्टान 2.0 ग्राम/किग्रा बीज की दर से उपचारित करके पौधशाला में बुवाई करें।
  3. अरहर की बुवाई के लिए खेत की तैयारी करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।किसान सान भाईयों को यह सलाह है कि वे बीजों को बोने से पहले अरहर के लिए उपयुक्त राईजोबियम तथा फास्फोरस में घुलनशील बेक्टीरिया से अवश्य उपचार कर लें इस उपचार से बीजो के अंकुरण तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। अरहर की उन्नत किस्में:- पूसा- 2001, पूसा-  991,पूसा- 992, पारस मानक, UPAS 120.
  4. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडों के अण्डें तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।
  5. इस मौसम में बेलवाली फसलों में न्यूनतम नमी बनाएं रखें अन्यथा मृदा में कम नमी होने से पुष्पन एंव परागण पर असर हो सकता है जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है।
  6. मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली./लीटर की दर से छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार फसल में कम अंतराल में सिंचाई करें।
  7. भिंडी की फसल में तुड़ाई के बाद यूरिया @ 5-10 किलो प्रति एकड़ की दर से डाले तथा उसके उपरांत सिंचाई करें। साथ ही तापमान को ध्यान में रखते हुए माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।
  8. तापमान अधिक रहने की संभावना को देखते हुए, किसान भाई तैयार सब्जियों की तुड़ाई सुबह या शाम को करें तथा इसके बाद इसे छायादार स्थान में रखें।
  9. इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत को समतल करवाएं।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

      डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र॰ कृष्णन (अध्यक्ष,कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग