जैव रसायन विभाग
डॉ. शैली प्रवीण
अध्यक्ष

फोन : 011-25842038
फैक्स : 011-25842038
ई-मेल: head_biochem[at]iari[dot]res[dot]in

 

फसल अनुसंधान में जैव रासायनिक अध्ययन के महत्व को स्वीकार करते हुए, जैव रसायन विज्ञान संभाग (डिवीजन ऑफ बायोकैमिस्ट्री) 1966 में एक संभाग के रूप में अस्तित्व में आया था , जिसमें आणविक जीवविज्ञान, जैव रसायन और पोषण संबंधी अनुसंधान पर अधिक जोर दिया गया। यह संभाग मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विज्ञान से उत्पन्न हुआ है । इसकी स्थापना के बाद से, संभाग ने सर्वोत्तम शोध, शिक्षण और प्रशिक्षण सुविधाओं का अधिग्रहण किया है, और 1995 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा एन ए आर एस में जैव रसायन विज्ञान में उन्नत फैकल्टी प्रशिक्षण (सी ए एफ टी) के केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त होने का गौरव प्राप्त है। 1995 से प्रति वर्ष संभाग निरंतर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कृषि वैज्ञानिक तथा शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है |

संभाग के कार्य क्षेत्र :

  • कृषि में वर्तमान समस्याओं से संबंधित मौलिक और व्यवहारिक जैव रासायनिक, आणविक जीव विज्ञान और पोषण संबंधी अनुसंधान करना।
  • अनाज और दालों के पौष्टिक मूल्य का मूल्यांकन करना।
  • बेहतर जीनोटाइप के विकास में योगदान करना।
  • अनाज और दालों में उपस्थित जहरीले या एंटी पोषण संबंधी कारकों की पहचान, निष्कासन और निष्क्रियता। जैसे खेसारी दाल में बी ओ ए ए, सोयाबीन में ट्रप्सिन अवरोधक, मूंगफली में एफ्लोटोक्सिन।
  • फल और सब्जियों के पौष्टिक गुणवत्ता का मूल्यांकन करना।
  • रोग और कीट प्रतिरोध की जैव रसायन।
  • सूखा प्रतिरोध की जैव रसायन।
  • संतुलित आहार का गठन।
  • कुशल मानव संसाधन विकसित करने के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना।
  • राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों के कृषि वैज्ञानिकों को जैव रसायन और आणविक जीवविज्ञान के क्षेत्र में उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • जैव रसायन विज्ञान में शिक्षण के लिए शिक्षण सहायक सामग्री विकसित करना।