भारत में अंगूर की खेती अनूठी है और इसे उष्‍ण से लेकर शीतोष्‍ण तक की लगभग सभी प्रकार की जलवायु वाली स्थितियों में उगाया जा सकता है। अंगूर के जननद्रव्‍य के संकलन, नए जीनप्ररूपों के प्रजनन, बढ़वार विनिमायकों के उपयोग, कृषि तकनीकों (कटाई,छंटाई,मूलवृंत्‍त,जल और पोषक तत्‍वों के आवश्‍यकता आदि सहित) के मानकीकरण पर अनुसंधान कार्य किए गए हैं। अंगूर की खेती की नई क्रियाओं जैसे लवण सहिष्‍णु मूलवृंतों का विकास, ड्रिप सिंचाई आदि को लोकप्रिय बनाया जा रहा है। उचित कटाई-छंटाई की तकनीक का उपयोग करते हुए मूलवृंतों के उपयोग से भारत के विभिन्‍न क्षेत्रों में अंगूर की खेती की व्‍यापक संभावनाएं उजागर हुई हैं।